देश की खबरें | अदालत ने बाल श्रम पीड़ितों को बकाया वेतन के भुगतान संबंधी याचिका पर केंद्र, आप सरकार से मांगा जवाब
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने बाल एवं बंधुआ मजदूरी के पीड़ितों को बकाया वेतन के भुगतान संबंधी जनहित याचिका पर केंद्र और ‘आप’ सरकार से बुधवार को जवाब मांगा।
नयी दिल्ली, 16 दिसंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने बाल एवं बंधुआ मजदूरी के पीड़ितों को बकाया वेतन के भुगतान संबंधी जनहित याचिका पर केंद्र और ‘आप’ सरकार से बुधवार को जवाब मांगा।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने बाल श्रम से बचाए गए एक बच्चे के पिता की याचिका पर श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, दिल्ली सरकार और पुलिस को नोटिस जारी किए।
यह भी पढ़े | बदल रही UP की तस्वीर, 8 महीने में 26 लाख से अधिक लोगों को मिला रोजगार.
पीठ ने कहा, ‘‘हमें विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दीजिए।’’
याचिकाकर्ता ने वकीलों कृति अवस्थी और निमिषा मेनन के जरिए दायर याचिका में अपने बच्चे और बाल श्रम के अन्य 115 पीड़ितों के बकाया वेतन के शीघ्र भुगतान का अनुरोध किया है।
यह भी पढ़े | AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी का ममता बनर्जी पर कड़ा प्रहार, कहा- मुस्लिम वोटर आपकी जागीर नहीं.
याचिका में प्राधिकारियों को निर्देश देने को कहा गया है कि वे उन‘‘77 मामलों में बकाया देने की’’ कार्रवाई शुरू करें, जिनकी बकाए को देने की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं की गई है।
याचिका में दावा किया गया है कि प्राधिकारी उसके बच्चे और बंधुआ मजदूरी के अन्य इसी प्रकार के पीड़ितों का बकाया वेतन मुहैया कराने में कथित रूप से नाकाम रहे हैं, जो उच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों के अनुसार इस प्रकार की राहत के हकदार हैं।
याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि उसके बच्चे को 2014 में बाल श्रम से बचाए जाने के सात दिन के भीतर बकाया वेतन का भुगतान किया जाना था, लेकिन छह साल में भी कुछ नहीं हुआ और बाल एवं बंधुआ मजदूरी के अन्य पीड़ितों की भी यही स्थिति है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)