देश की खबरें | अदालत ने मराठी अभिनेत्री से बलात्कार मामले में व्यक्ति को आरोपमुक्त करने से इनकार किया

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मुंबई, 26 जुलाई बंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक मराठी अभिनेत्री द्वारा दर्ज कराए गए बलात्कार और धोखाधड़ी के मामले में एक व्यक्ति को आरोपमुक्त करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उसके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार हैं।

न्यायमूर्ति एन जे जामदार की एकल पीठ ने सिद्धार्थ बंथिया द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने खुद को निर्दोष बताते हुए दावा किया था कि अभिनेत्री के साथ उसके संबंध सहमति से थे और उनके बीच कथित शादी सिर्फ एक फिल्म की शूटिंग थी तथा यह वास्तविक नहीं थी।

अभिनेत्री के अनुसार, वह 2008 में बंथिया से मिलीं और उन्होंने जुलाई 2010 में शादी कर ली। सितंबर 2010 में, एक महिला ने उन्हें सूचित किया कि वह बंथिया की कानूनी पत्नी है और उनके दो बच्चे हैं।

जब अभिनेत्री ने इस बारे में बंथिया से पूछा तो उसने उन्हें जाली और मनगढ़ंत दस्तावेज दिखाए, जिनमें दावा किया गया कि उसने अपनी पहली पत्नी को तलाक दे दिया है।

अभिनेत्री के अनुसार, एक साल बाद जब उन्हें पता चला कि तलाक के कागजात फर्जी थे तो उन्होंने 2013 में पुणे में बंथिया के खिलाफ धोखाधड़ी और बलात्कार के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई।

बंथिया की आरोपमुक्त करने की याचिका का विरोध करते हुए अभिनेत्री की ओर से पेश वकील ऐश्वर्या कांतावाला ने तर्क दिया कि एक विवाहित व्यक्ति होने के बावजूद, आरोपी ने अभिनेत्री को विश्वास दिलाया कि वह उसकी कानूनी पत्नी है और शारीरिक संबंध के लिए उसकी सहमति ली। उन्होंने कहा कि इसलिए, इसे एक सहमति संबंध के रूप में नहीं माना जा सकता।

न्यायमूर्ति जामदार ने अपने आदेश में कहा कि यह दिखाने के लिए पर्याप्त सामग्री और सबूत हैं कि शिकायतकर्ता तथा आरोपी के बीच एक विवाह कार्यक्रम हुआ था। पीठ ने कहा, "वास्तव में, यह परीक्षण का एक मामला है।"

अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 के तहत बलात्कार का मामला बनता है और याचिकाकर्ता के खिलाफ आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त आधार हैं।

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