देश की खबरें | अदालत का ईवीएम में ‘सबसे कम अयोग्य उम्मीदवार’ का विकल्प देने संबंधी याचिका पर विचार से इंकार
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें केंद्र और चुनाव आयोग को चुनावों के दौरान ‘सबसे कम अयोग्य उम्मीदवार (सर्वाधिक योग्य उम्मीदवार)’ के लिए वोट को लेकर ईवीएम/मतपत्र में विकल्प मुहैया कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।
नयी दिल्ली, आठ दिसंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें केंद्र और चुनाव आयोग को चुनावों के दौरान ‘सबसे कम अयोग्य उम्मीदवार (सर्वाधिक योग्य उम्मीदवार)’ के लिए वोट को लेकर ईवीएम/मतपत्र में विकल्प मुहैया कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने कहा कि मतदाता नोटा विकल्प का इस्तेमाल कर दलों द्वारा उतारे गए उम्मीदवारों के संबंध में अपनी नापसंदगी जता सकते हैं । पीठ ने कहा कि एक विशेष उम्मीदवार को चुनना भी दूसरे उम्मीदवारों के संबंध में नापसंदगी को जाहिर करता है।
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एक बीमा कंपनी में चिकित्सा अधिकारी के तौर पर काम करने वाले आयुर्वेदिक डॉक्टर अक्षय यादवराव बजाड की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह टिप्पणी की । उन्होंने दलील दी थी कि ईवीएम में ‘न्यूनतम अयोग्य उम्मीदवार’ के संबंध में विकल्प मुहैया कराने से राजनीतिक दल उच्च नैतिकता वाले और निष्ठावान उम्मीदवारों को चुनाव में उतारेंगे।
डॉक्टर की ओर से पेश अधिवक्ता रोहन थवानी ने कहा कि उनके मुवक्किल ने पिछले साल दिसंबर में केंद्र के समक्ष इस विषय पर एक आवेदन दिया था और इसे चुनाव आयोग के पास भेज दिया गया लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी इस पर कुछ नहीं हुआ।
याचिका में कहा गया कि जनवरी में एक आवेदन विधि मंत्रालय को भी दिया गया था लेकिन उसने भी आवेदन को चुनाव आयोग के पास भेज दिया।
याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि वह चुनाव आयोग को निर्देश दे कि आवेदनों को दबाकर बैठने की जगह वह उनपर फैसला करे।
अदालत ने कोई आदेश जारी करने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता से चुनाव आयोग से संपर्क करने को कहा।
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