देश की खबरें | अदालत ने सीएचआरआई पंजीकरण के निलंबन के संबंध में रिकॉर्ड पेश करने के लिए केंद्र को समय दिया

नयी दिल्ली, 25 अक्टूबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र को विदेशी अंशदान (नियमन) कानून (एफसीआरए) के कथित उल्लंघन के लिए राष्ट्रमंडल मानवाधिकार पहल (सीएचआरआई) के पंजीकरण के अस्थायी निलंबन से संबंधित रिकॉर्ड पेश करने के लिए सोमवार को समय दिया।

संगठन के वरिष्ठ वकील ने कहा कि पंजीकरण रद्द करने के लिए कार्यवाही के अभाव में निलंबन का कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता है। इसके बाद न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने निलंबन के खिलाफ सीएचआरआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि भौतिक सुनवाई के दिन प्रासंगिक रिकॉर्ड उनके पास लाया जाए।

न्यायाधीश ने केंद्र सरकार के वकील से कहा, ‘‘जब आप निलंबन आदेश जारी करते हैं, तो जांच होनी चाहिए। रिकॉर्ड प्राप्त करें। निलंबन में, चुनौती बहुत सीमित है।’’

न्यायालय ने मामले में अगली सुनवाई की तिथि 28 अक्टूबर तय की।

केंद्र सरकार के वकील अनिल सोनी ने कहा कि निलंबन आदेश जारी होने के समय, ‘‘प्रारंभिक जांच’’ पहले ही शुरू की जा चुकी थी क्योंकि याचिकाकर्ता को ‘‘प्रश्नावली’’ भेजी गई थी और उसके खातों का भी ऑडिट किया जा रहा था।

उन्होंने अदालत से संबंधित दस्तावेजों को रिकॉर्ड में लाने के लिए समय मांगा।

याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकीलों अरविंद दातार और सीयू सिंह ने दावा किया कि विदेशी अंशदान (नियमन) कानून (एफसीआरए), 2010 की योजना के तहत याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई और आज तक, कारण बताओ नोटिस भी जारी नहीं किया गया है।

सिंह ने कहा, “मामले में कोई कारण बताओ या पूछताछ नहीं है। 180 दिनों (अस्थायी निलंबन के) में से 141 दिन पहले ही जा चुके हैं।’’

सीएचआरआई ने अपनी याचिका में भारत सरकार, विदेश विभाग (एफसीआरए निगरानी इकाई), गृह मंत्रालय के उप सचिव द्वारा पारित सात जून के निलंबन आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया है।

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