देश की खबरें | किसान नेताओं और केंद्र के बीच बातचीत बेनतीजा, अगली बैठक चार मई को

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. किसानों की फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी सहित अन्य मांगों पर चर्चा के वास्ते किसान नेताओं और केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल के बीच चंडीगढ़ में बुधवार को आयोजित सातवें दौर की बातचीत बेनतीजा रही। हालांकि, बाचतीत में शामिल केंद्रीय मंत्रियों ने किसानों के हित को सर्वोपरि बताया।

चंडीगढ़, 19 मार्च किसानों की फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी सहित अन्य मांगों पर चर्चा के वास्ते किसान नेताओं और केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल के बीच चंडीगढ़ में बुधवार को आयोजित सातवें दौर की बातचीत बेनतीजा रही। हालांकि, बाचतीत में शामिल केंद्रीय मंत्रियों ने किसानों के हित को सर्वोपरि बताया।

तीन घंटे से अधिक समय तक चली बातचीत के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वार्ता जारी रहेगी और अगली बैठक चार मई को होगी।

शिवराज ने कहा, “सौहार्दपूर्ण माहौल में सकारात्मक और रचनात्मक चर्चा हुई। बातचीत जारी रहेगी। अगली बैठक चार मई को होगी।”

हालांकि, उन्होंने मीडिया के किसी सवाल का जवाब नहीं दिया।

चर्चा मुख्य रूप से फसलों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग पर केंद्रित रही।

किसान नेताओं ने जोर देकर कहा कि (फसलों के लिए) एमएसपी की गारंटी देने वाले कानून को लागू करने में कोई समस्या नहीं होगी।

उन्होंने मीडिया में आई उन खबरों का भी जिक्र किया, जिनमें कहा गया है कि अमेरिकी सरकार भारत सरकार पर कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क हटाने के लिए दबाव डाल रही है।

शिवराज के अलावा उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी चंडीगढ़ में सेक्टर-26 स्थित महात्मा गांधी लोक प्रशासन संस्थान में आयोजित वार्ता में शामिल हुए।

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक ने भी बातचीत में हिस्सा लिया।

यह पिछले साल फरवरी के बाद से दोनों पक्षों के बीच सातवें दौर की वार्ता थी।

शिवराज ने किसानों को संबोधित करते हुए दोहराया कि सरकार उनके कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने याद दिलाया कि सरकार देशभर में किसानों के समक्ष आ रही समस्याओं के समाधान के लिए किस तरह नियमित रूप से नीतिगत हस्तक्षेप करती आई है।

एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि बैठक में किसानों की विभिन्न मांगों के कानूनी, आर्थिक और अन्य पहलुओं पर विचार किया गया।

इसमें कहा गया है कि चर्चा के आधार पर सरकार ने देशभर के किसान संगठनों के अलावा राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों, व्यापारियों, निर्यातकों तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग सहित अन्य हितधारकों के साथ परामर्श करने का फैसला लिया है।

विज्ञप्ति के मुताबिक, हितधारकों के साथ परामर्श के बाद सकारात्मक भावना से वार्ता जारी रखने का निर्णय लिया गया है।

इसमें कहा गया है कि बैठक में केंद्रीय मंत्रियों ने किसानों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी और अन्य हितधारकों की चिंताओं पर ध्यान देती रहेगी तथा किसानों के हित में कार्य करेगी।

उन्होंने किसान नेताओं से कहा, “किसानों का हित सर्वोपरि है।”

विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्रीय मंत्रियों ने किसान समुदाय से विरोध-प्रदर्शन के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की और कहा कि समाधान केवल बातचीत एवं चर्चा से ही निकलेगा।

पंजाब के वित्त मंत्री चीमा ने संवाददाताओं से कहा कि केंद्रीय मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि एमएसपी की गारंटी वाले कानून की मांग के समर्थन में किसानों की ओर से साझा किए गए आंकड़ों का अध्ययन करने की जरूरत है।

चीमा ने कहा, “पिछली बैठक की तरह ही किसानों ने एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग के समर्थन में आंकड़े साझा किए। केंद्रीय मंत्रियों ने कहा कि इस पर और अध्ययन करने की जरूरत है। चूंकि, कानून पूरे देश के लिए बनेगा, इसलिए सभी हितधारकों का पक्ष सुनना जरूरी है।”

उन्होंने कहा, “इसके लिए भारत सरकार के एक अधिकारी को नियुक्त किया गया है। आने वाले समय में सभी हितधारकों-उपभोक्ताओं, व्यापारियों या संगठनों-की राय जानी जाएगी।”

किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि बैठक में शिवराज ने उन्हें बताया कि किसानों की ओर से साझा की गई जानकारी पर कृषि मंत्रालय में चर्चा की गई थी।

कोहाड़ के मुताबिक, केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल ने किसानों को बताया कि एमएसपी की गारंटी वाले कानून को लेकर कुछ मुद्दे या समस्याएं सामने आ सकती हैं, जबकि किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि इसके क्रियान्वयन में कोई बाधा नहीं आएगी।

कोहाड़ के अनुसार, “उन्होंने (केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल ने) कहा कि कुछ मुद्दे सामने आ सकते हैं और उन मुद्दों पर विस्तृत चर्चा के लिए सरकार को कुछ समय चाहिए। सरकार ने यह भी कहा कि वह अंतर-मंत्रालयी चर्चा करना चाहती है। इसके बाद वे फिर से हमारे साथ बैठक करेंगे।”

कोहाड़ ने बताया कि किसान नेताओं ने केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल से कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क हटाने के संबंध में अमेरिका के किसी भी दबाव के आगे न झुकने की अपील की।

उन्होंने कहा, “हमने स्पष्ट कर दिया है कि अगर कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क हटा दिया गया, तो यह किसानों के लिए मौत का वारंट होगा। किसानों के हितों की रक्षा करना भारत सरकार की जिम्मेदारी है।”

किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने बताया, “उन्होंने (सरकार ने) कहा कि अगर एमएसपी की गारंटी वाला कानून बनाया जाता है, तो कुछ समस्याएं आ सकती हैं, लेकिन हमें ऐसा नहीं लगता। सरकार ने यह भी कहा कि वह बातचीत जारी रखना चाहती है।”

बातचीत से पहले पंधेर ने कहा था कि संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा का 28 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बैठक में हिस्सा लेगा।

दोनों संगठन फसलों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी सहित अन्य मांगों को लेकर किसानों के आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं।

पंधेर ने संवाददाताओं से कहा था कि किसानों को उम्मीद है कि सरकार उनसे जुड़े मुद्दों का समाधान करेगी। उन्होंने कहा था, “हम सकारात्मक सोच के साथ यहां आए हैं। बैठक में कुछ फैसले होने चाहिए। हमें उम्मीद है कि एमएसपी की गारंटी वाले कानून पर गतिरोध समाप्त होगा और बातचीत आगे बढ़ेगी।”

केंद्र पर किसानों की मांग मानने का दबाव बनाने के लिए पिछले साल 26 नवंबर से अनिश्चितकालीन अनशन कर रहे जगजीत सिंह डल्लेवाल एंबुलेंस से बैठक स्थल पहुंचे। उन्होंने कहा कि वे किसानों द्वारा उनकी मांगों के समर्थन में पेश आंकड़ों पर केंद्र की प्रतिक्रिया की उम्मीद कर रहे हैं।

किसानों और केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल के बीच पिछली बैठक चंडीगढ़ में 22 फरवरी को हुई थी। इसमें शिवराज, प्रह्लाद जोशी और पीयूष गोयल शामिल हुए थे।

इस बैठक में केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल ने विशेषज्ञों के साथ चर्चा के लिए फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी को लेकर किसानों से उनके दावों के समर्थन में आंकड़े मांगे थे।

केंद्रीय मंत्री जोशी के नेतृत्व में 14 फरवरी को भी एक केंद्रीय टीम और किसानों के प्रतिनिधियों के बीच एक बैठक हुई थी।

इस बैठक से पहले, फरवरी 2024 में केंद्रीय मंत्रियों और प्रदर्शनकारी किसानों के बीच चार दौर की बातचीत हुई थीं, लेकिन इनमें कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका था।

प्रदर्शनकारी किसान पिछले साल 13 फरवरी से पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू और खनौरी बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं।

किसान फसलों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी के अलावा, कर्ज माफी, किसानों और कृषि मजदूरों के लिए पेंशन, बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं किए जाने, किसानों के खिलाफ पुलिस में दर्ज मामलों को वापस लिए जाने, उत्तर प्रदेश में 2021 लखीमपुर-खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय, भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 को बहाल करने और 2020-21 में पिछले आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा दिए जाने की मांग कर रहे हैं।

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