देश की खबरें | वाणिज्यिक उड़ानों में जीपीएस उपकरण पर प्रतिबंध आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र से जवाब तलब

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने वाणिज्यिक उड़ानों में ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) उपकरण ले जाने पर प्रतिबंध लगाने के नागरिक उड्डयन मंत्रालय के जनवरी 2023 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है।

नयी दिल्ली, 30 नवंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने वाणिज्यिक उड़ानों में ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) उपकरण ले जाने पर प्रतिबंध लगाने के नागरिक उड्डयन मंत्रालय के जनवरी 2023 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है।

उच्च न्यायालय ने उस याचिका पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय को नोटिस जारी किया, जिसमें यहां इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 पर याचिकाकर्ता के जीपीएस उपकरण की ‘गैरकानूनी’ जब्ती के लिए अधिकारियों को हर्जाने के निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया था।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया और मामले की अगली सुनवाई के लिए अगले साल दो अप्रैल की तारीख निर्धारित की।

याचिकाकर्ता ने हवाई यात्रा के दौरान जीपीएस उपकरण ले जाने की अनुमति भी मांगी थी।

याचिकाकर्ता राहुल बनर्जी ने कहा कि चूंकि वह एक पर्यावरण वैज्ञानिक हैं और उन्हें पूरे भारत में यात्रा करनी होती है, इसलिए जीपीएस उपकरण उनके लिए व्यापार का एक अभिन्न उपकरण है।

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि दो जून, 2022 को उनके मुवक्किल का 'गार्मिन' जीपीएस उपकरण हवाई अड्डे पर अधिकारियों द्वारा जब्त कर लिया गया था, यद्यपि वह (याचिकाकर्ता) पिछले अवसरों पर अपने ‘हैंड-बैगेज’ में उपकरण लेकर हवाई यात्रा कर चुके थे।

वकील ने कहा कि बाद में यह पता चला कि उस समय वाणिज्यिक विमानों पर जीपीएस उपकरण ले जाना प्रतिबंधित नहीं था। वकील ने कहा कि उपकरण की जब्ती मौजूदा कानून का उल्लंघन है और यह गलत धारणा है कि यह एक 'सैटेलाइट फोन' है।

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इस साल जनवरी में एक परिशिष्ट जारी कर सैटेलाइट फोन की तरह ही हवाई यात्रा के दौरान जीपीएस उपकरणों को ले जाने पर रोक लगा दी थी।

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