देश की खबरें | देशद्रोह कानून रद्द करने के बारे में केंद्र को शेखी नहीं बघारनी चाहिए: राउत

मुंबई, 12 अगस्त शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार को राजद्रोह कानून को रद्द करने के बारे में शेखी नहीं बघारनी चाहिए क्योंकि वह वर्तमान में अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ ऐसे कानूनों का उपयोग कर रहा है, जो अंग्रेजों द्वारा लाए गए कानूनों से भी ज्यादा भयावह हैं।

संवाददाताओं से बातचीत में राउत ने पूछा कि क्या कानून को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ताओं और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रदीप कुरुलकर की मदद करने के लिए रद्द किया जा रहा है। कुरुलकर पर जासूसी करने का मामला दर्ज किया गया है।

महाराष्ट्र पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने पुणे में डीआरडीओ की एक प्रयोगशाला के निदेशक रहे कुरुलकर के खिलाफ पिछले महीने एक अदालत में आरोप पत्र दायर किया था।

उन्हें एक पाकिस्तानी एजेंट को गोपनीय जानकारी प्रदान करने के आरोप में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत तीन मई को गिरफ्तार किया गया था और अब वह न्यायिक हिरासत में हैं।

राउत ने उच्चतम न्यायालय द्वारा धन शोधन मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता और पूर्व मंत्री नवाब मलिक को जमानत देने का भी स्वागत किया।

राउत ने आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘देशद्रोह का कानून खत्म करने के बारे में शेखी मत बघारिये। आप (भाजपा) ऐसे कानून लाए हैं जो अंग्रेजों द्वारा बनाए गए कानूनों से भी ज्यादा डरावने हैं और वे आपके राजनीतिक विरोधियों को परेशान करने के लिए बनाए जा रहे हैं।’’

आपराधिक कानूनों में आमूल-चूल बदलाव करते हुए केंद्र ने शुक्रवार को लोकसभा में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को बदलने के लिए तीन विधेयक पेश किए, जिनमें राजद्रोह कानून को निरस्त करने समेत अन्य बातें शामिल हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) विधेयक-2023 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) विधेयक- 2023 पेश किया जो भारतीय दंड संहिता का स्थान लेगा। भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लेने के लिए भारतीय साक्ष्य (बीएस) विधेयक- 2023 लाया गया।

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