देश की खबरें | नकदी बरामदगी मामला: न्यायमूर्ति वर्मा की याचिका पर सुनवाई के लिए पीठ गठित करेगा न्यायालय

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नयी दिल्ली, 23 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वह इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की उस याचिका पर सुनवाई के लिए एक पीठ का गठन करेगा, जिसमें उन्होंने आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट को अमान्य करने का अनुरोध किया है। समिति ने उन्हें नकदी बरामदगी विवाद मामले में कदाचार का दोषी पाया था।

न्यायमूर्ति वर्मा ने तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना द्वारा आठ मई को की गई उस सिफारिश को भी रद्द करने का अनुरोध किया है, जिसमें पूर्व न्यायमूर्ति खन्ना ने संसद से उनके खिलाफ महाभियोग शुरू करने का आग्रह किया था।

प्रधान न्यायाधीश गवई, न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति जे. बागची की पीठ के समक्ष मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया गया था।

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने वर्मा की ओर से मामले का उल्लेख किया। सिब्बल ने कहा कि याचिका न्यायमूर्ति वर्मा को हटाने के लिए तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश द्वारा की गई सिफारिश के संबंध में थी।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने कुछ संवैधानिक मुद्दे उठाए हैं। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि इसे जल्द से जल्द सूचीबद्ध किया जाए।’’

इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मुझे एक पीठ का गठन करना होगा।’’

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि उनके लिए इस मामले को उठाना शायद उचित नहीं होगा क्योंकि वह भी इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

प्रधान न्यायाधीश ने सिब्बल से कहा, ‘‘हम इस पर विचार करेंगे और एक पीठ का गठन करेंगे।’’

अपनी याचिका में न्यायमूर्ति वर्मा ने दलील दी कि जांच ने ‘‘साक्ष्य को पलट दिया’’ जिसके कारण वह जांच का अनुरोध कर रहे हैं और अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों का खंडन कर रहे हैं।

न्यायमूर्ति वर्मा ने आरोप लगाया कि समिति के निष्कर्ष एक पूर्वकल्पित कहानी पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि जांच की समय-सीमा केवल ‘‘प्रक्रियात्मक निष्पक्षता’’ की कीमत पर, कार्यवाही को शीघ्रता से समाप्त करने की इच्छा से प्रेरित थी।

याचिका में दलील दी गई है कि जांच समिति ने उन्हें पूर्ण और निष्पक्ष सुनवाई का अवसर दिए बिना ही प्रतिकूल निष्कर्ष निकाले।

घटना की जांच कर रही जांच समिति की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि न्यायमूर्ति वर्मा और उनके परिवार के सदस्यों का उस स्टोर रूम पर परोक्ष या प्रत्यक्ष नियंत्रण था जहां आधी जली हुई नकदी का बड़ा जखीरा बरामद किया गया था। यह घटना उनके कदाचार को साबित करती है, जो उन्हें पद से हटाए जाने के लिए पर्याप्त है।

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अगुवाई वाली तीन न्यायाधीशों की समिति ने 10 दिन तक जांच की, 55 गवाहों से पूछताछ की और वर्मा के आधिकारिक आवास पर उस घटनास्थल का दौरा किया जहां 14 मार्च को रात करीब 11 बजकर 35 मिनट पर अचानक आग लग गई थी।

न्यायमूर्ति वर्मा उस समय दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे और अब इलाहाबाद उच्च न्यायालय में न्यायाधीश हैं।

रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश खन्ना ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग चलाने की सिफारिश की थी।

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