पटना, चार फरवरी बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (बीएसपीसीबी) के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि पटना में कुछ स्थानों पर ग्रीनहाउस गैस एवं कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) के स्तर में वृद्धि चिंता का विषय है और इस पर निरंतर नजर बनाए रखने एवं इसे काबू करने की आवश्यकता है।
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी), भारत द्वारा किए गए एक नवीनतम सर्वेक्षण के अनुसार, राज्य की राजधानी में कुछ स्थानों पर कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर वैश्विक औसत से कहीं अधिक है।
यूएनडीपी ने सात जून, 2024 से 29 जनवरी, 2025 तक पटना में वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का पता लगाने के लिए सर्वेक्षण किया।
यूएनडीपी ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (बीएसपीसीबी) के साथ पिछले साल एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे जिसके तहत पटना के लिए यह सर्वेक्षण किया गया।
हालांकि कार्बन डाइऑक्साइड को वायु प्रदूषक की श्रेणी में नहीं रखा गया है, लेकिन इसकी उच्च सांद्रता वायुमंडल को गर्म करती है इसलिए विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पटना में इसकी उच्च सांद्रता के कारण गर्मियों के मौसम में शहर के कुछ हिस्सों में तापमान बढ़ सकता है।
यूएनडीपी सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, जून 2024 में पटना के समनपुरा इलाके में कार्बनडाइ ऑक्साइड सांद्रता 440.9 पीपीएम थी जो 29 जनवरी, 2025 को बढ़कर 940.8 पीपीएम हो गई है।
समनपुरा में दिसंबर 2024 में ग्रीनहाउस गैस सांद्रता का उच्चतम स्तर दर्ज किया गया और यह 959.1 पीपीएम था। इसी इलाके में नवंबर 2024 में सीओटू सांद्रता 912.2 पीपीएम थी।
इस साल जनवरी में पटना के भीड़-भाड वाले इलाके ‘श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल’ के पास सीओटू सांद्रता 515.4 पीपीएम दर्ज की गई, जबकि पिछले महीने शिमली नवाबगंज इलाके में यह 513.6 पीपीएम थी।
रिपोर्ट के अनुसार, पटना के मैनपुरा (दानापुर रोड) में सीओटू की सांद्रता 493.7 पीपीएम थी और इसके बाद किदवईपुरी (490.6 पीपीएम), तारामंडल (480.7 पीपीएम), अशोक नेताजी पथ-बालापुर (446.4 पीपीएम), रुकनपुरा (445.3 पीपीएम) और श्री कृष्णपुरम-दानापुर (437.2 पीपीएम) में अधिक सांद्रता दर्ज की गई।
वैश्विक स्तर पर कार्बन डाइऑक्साइड की औसत वायुमंडलीय सांद्रता 2023 में 419.3 पीपीएम थी।
बीएसपीसीबी के अध्यक्ष डी.के. शुक्ला से यूएनडीपी की इस रिपोर्ट के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘पटना में कुछ स्थानों पर सीओटू की उच्च सांद्रता चिंता का विषय है। यह वैश्विक औसत से बहुत अधिक है। हालांकि सीओटू को वायु प्रदूषक नहीं माना जाता है लेकिन वायुमंडल में इसकी उच्च सांद्रता वातावरण को गर्म करती है।’’
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