देश की खबरें | नौकरशाहों को जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को विफल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती : न्यायालय

नयी दिल्ली, 11 मार्च उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र के एक गांव में एक महिला को सरपंच पद पर बहाल करने के बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा है कि नौकरशाहों को “जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को विफल करने” की इजाजत नहीं दी जा सकती।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि महाराष्ट्र में हाल-फिलहाल में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें नौकरशाहों ने पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ दुर्व्यवहार किया।

पीठ ने कहा, “हमने दो-तीन मामलों में फैसला सुनाया है, जिनमें बाबू निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ दुर्व्यवहार करते पाए गए थे। ऐसा आम तौर पर महाराष्ट्र में हो रहा है। इन बाबुओं को निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधीन होना चाहिए। इन नौकरशाहों को जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को विफल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।”

उसने कहा कि न्यायालय को यह भी पता चला है कि नौकरशाह खासतौर पर जमीनी स्तर पर निर्वाचित प्रतिनिधियों को अयोग्य ठहराने के लिए पुराने मामलों को खोलने की कोशिश कर रहे हैं।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अर्चना सचिन भोसले के वकील से कहा, “वे (नौकरशाह) पुराने मामलों को खोलने का प्रयास करते हैं, जैसे कि आपके दादा ने सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया है, इसलिए आप अयोग्य हैं।” उच्च न्यायालय ने सरपंच के रूप में अर्चना का निर्वाचन 29 जनवरी को रद्द कर दिया था।

कलावती राजेंद्र कोकाले को सरपंच के रूप में बहाल करते हुए शीर्ष अदालत ने रायगढ़ के जिलाधिकारी के सात जून 2024 के उस आदेश को रद्द करने के उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा, जिसके तहत रोहा तालुका के ऐंघर गांव में सरपंच पद खाली होने की घोषणा की गई थी और चुनाव कराने के लिए एक निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया गया था।

पीठ ने सात मार्च को पारित आदेश में कहा, “हम उच्च न्यायालय की ओर से अपनाए गए दृष्टिकोण से सहमत हैं... हम प्रतिवादी संख्या एक (कोकाले) को ग्राम पंचायत, ऐंघर, तालुका रोहा, जिला रायगढ़ की विधिवत निर्वाचित प्रधान के रूप में बहाल किए जाने का समर्थन करते हैं।”

कोकाले ने जिलाधिकारी के सात जून 2024 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें सरपंच पद से उनके इस्तीफे पर महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम की धारा-29 के तहत मुहर लगाई गई थी, जबकि उन्होंने इस्तीफा वापस ले लिया था।

उच्च न्यायालय ने कहा था कि कोकाले का इस्तीफा “प्रभावी नहीं हुआ”, क्योंकि उन्होंने 15 मार्च 2024 को आयोजित एक बैठक के दौरान इसे वापस ले लिया था।

उसने कहा था, “जिलाधिकारी ने गलत निष्कर्ष निकाला कि सरपंच का पद रिक्त हो गया है, जबकि उन्होंने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि इस्तीफा पहले ही वापस ले लिया गया था।”

उच्च न्यायालय ने जिलाधिकारी के आदेश को “अवैध” और “रद्द किए जाने योग्य” करार दिया था। इसके चलते भोसले का निर्वाचन “शुरू से ही शून्य” माना गया था।

उच्च न्यायालय ने कहा था, “चूंकि, याचिकाकर्ता ने सरपंच का पद नहीं छोड़ा, इसलिए प्रतिवादी संख्या 4 के उस पद पर निर्वाचित होने का कोई सवाल ही नहीं है।”

उसने कहा था कि हालांकि, ग्राम पंचायत अधिनियम की धारा-29 में इस्तीफा वापस लेने के लिए कोई विशिष्ट प्रावधान नहीं है, फिर भी त्यागपत्र देने वाले सदस्य, उपसरपंच या सरपंच को उसे वापस लेने का अंतर्निहित अधिकार है।

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