जरुरी जानकारी | विदेशों में तेजी, मांग बढ़ने से बीते सप्ताह लगभग सभी तेल-तिलहन कीमतों में सुधार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. वैश्विक बाजारों में तेजी तथा निर्यात के साथ-साथ स्थानीय मांग के कारण दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बीते सप्ताह सरसों, सोयाबीन, मूंगफली, सीपीओ और पामोलीन सहित लगभग सभी तेल-तिलहन कीमतों में सुधार देखने को मिला।

नयी दिल्ली, 18 अप्रैल वैश्विक बाजारों में तेजी तथा निर्यात के साथ-साथ स्थानीय मांग के कारण दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बीते सप्ताह सरसों, सोयाबीन, मूंगफली, सीपीओ और पामोलीन सहित लगभग सभी तेल-तिलहन कीमतों में सुधार देखने को मिला।

बाजार सूत्रों ने कहा कि सरसों की रोक-रोक कर बिक्री करने का काम किसान कर रहे हैं और मंडियों में कम उपज ला रहे हैं। आयातित तेलों के मुकाबले सस्ता होने के कारण सरसों में चावल भूसी (राइस ब्रान) जैसे सस्ते तेलों की मिलावट नहीं हो रही है और उपभोक्ताओं को शुद्ध सरसों तेल खाने को मिल रहा है। सूत्रों ने कहा कि सरसों की भारी मांग और आपूर्ति की कमी होने से सरसों तेल-तिलहन कीमतों में सुधार आया।

उन्होंने कहा कि बीते सप्ताह रुपये के मुकाबले डॉलर के मजबूत होने से सभी तेल कीमतों में सुधार आया है।

सूत्रों ने कहा कि ऊंचा भाव होने के कारण व्यापारियों एवं किसानों के पास सोयाबीन का स्टॉक नहीं है। जबकि पॉल्ट्री वालों की घरेलू मांग के साथ सोयाबीन के तेल रहित खल के निर्यात की भारी मांग है। सरसों और मूंगफली के डीओसी की भी मांग है जिसके कारण समीक्षाधीन सप्ताह में इनके तेल-तिलहन कीमतों में सुधार आया। उन्होंने कहा कि निर्यात के साथ-साथ स्थानीय मांग बढ़ने से मूंगफली तेल-तिलहनों के भाव में भी पर्याप्त सुधार दर्ज हुआ।

उन्होंने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में तेजी के बीच सीपीओ और पामोलीन तेल की मांग बढ़ने से सीपीओ और पामोलीन तेल कीमतों में सुधार आया।

सूत्रों ने कहा कि सरकार को इस बात पर ध्यान देना होगा कि किन कारणों से देश तेल-तिलहन मामने में आत्मनिर्भर नहीं हो पाया।

प्रमुख तेल तिलहन विशेषज्ञ पवन गुप्ता ने कहा कि देश के विभिन्न अग्रणी तेल संगठन सरकार के सामने तेल-तिलहन के मामले में गलत तस्वीर पेश करते आये हैं और सही समस्याओं को सरकार के सामने नहीं रखते। उदाहरण के लिए उन्होंने बताया कि बीते कई सालों में उन्होंने सरकार को आगाह नहीं किया कि खाद्य तेलों के बढ़ते आयात को रोकने के लिए क्या कदम उठाये जाने चाहिए। इसी प्रकार उन्होंने मंडियों में सरसों, सोयाबीन या अन्य किसी देशी तेल के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम होने की स्थिति में हाय-तौबा नहीं मचाई और न ही सरकार को आगाह किया। लेकिन जब आयात शुल्क में वृद्धि हुई और किसानों को सरकार ने तेल-तिलहनों के अच्छे दाम दिलाये, तो तेलों के दाम बढ़ने की चिंता व्यक्त करना शुरू कर दिया।

उन्होंने कहा कि तेल-तिलहनों के लिए यदि किसानों को अच्छे दाम मिलते हैं, तो इससे महंगाई बढ़ने के बजाय किसानों के पास पैसा आयेगा और वे अधिक तिलहन उत्पादन के लिए प्रेरित होंगे, आयात पर निर्भरता कम होगी, खाद्य तेलों के आयात पर होने वाले करोड़ों के डॉलर की विदेशी मुद्रा बचेगी और अर्थव्यवस्था मजबूत होने के साथ रोजगार बढ़ेंगे।

पिछले सप्ताह सरसों दाना का भाव 750 रुपये बढ़कर 7,000-7,100 रुपये प्रति क्विन्टल हो गया जो इससे पिछले सप्ताहांत 6,310-6,350 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ था। सरसों दादरी तेल का भाव भी 1,600 रुपये सुधरकर 14,500 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुआ। सरसों पक्की घानी और कच्ची घानी टिनों के भाव भी समीक्षाधीन सप्ताहांत में 175-175 रुपये सुधार के साथ क्रमश: 2,205-2,285 रुपये और 2,385-2,415 रुपये प्रति टिन पर बंद हुए।

विदेशों में तेजी के रुख के बीच सोयाबीन के तेल रहित खल की स्थानीय पॉल्ट्री फर्मो के अलावा विदेशों से भारी मांग है जिससे सोयाबीन तेल-तिलहन कीमतों में सुधार देखा गया। सोयाबीन दाना और लूज का भाव क्रमश: 500 रुपये और 600 रुपये का सुधार दर्शाता क्रमश: 7,250-7,300 रुपये और 7,150-7,200 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुआ।

सोयाबीन दिल्ली, इंदौर और सोयाबीन डीगम का भाव क्रमश: 850 रुपये, 650 रुपये और 880 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 15,200 रुपये, 14,800 रुपये और 13,950 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुआ।

निर्यात मांग के कारण मूंगफली दाना 75 रुपये सुधरकर 6,560-6,605 रुपये, मूंगफली गुजरात 100 रुपये के सुधार के साथ 16,000 रुपये क्विन्टल तथा मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड का भाव 15 रुपये के सुधार के साथ 2,545-2,605 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ।

सप्ताह के दौरान कच्चा पाम तेल (सीपीओ) का भाव 320 रुपये बढ़कर 12,100 रुपये प्रति क्विन्टल हो गया। पामोलीन दिल्ली और पामोलीन कांडला तेल के भाव समीक्षाधीन सप्ताहांत में क्रमश: 450 रुपये और 300 रुपये का सुधार दर्शाते क्रमश: 14,000 रुपये और 12,900 रुपये प्रति क्विंटल हो गये।

बाकी तेलों में तिल मिल डिलिवरी का भाव 400 रुपये के सुधार के साथ 15,200-18,200 रुपये प्रति क्विन्टल हो गया। बिनौला मिल डिलिवरी हरियाणा 1,100 रुपये बढ़कर 14,600 रुपये हो गया। वहीं मक्का खल का भाव भी 100 रुपये सुधरकर 3,800 रुपये क्विन्टल पर बंद हुआ। तैयार खाद्य वस्तु निर्माता कंपनियों और शादी ब्याह में मक्का रिफाइंड की मांग बढ़ रही है जिसे काफी बेहतर माना जाता है।

राजेश

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