देश की खबरें | भाजपा नेता तरुण चुघ ने की वक्फ़ विधेयक पारित होने की सराहना

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चंडीगढ़, चार अप्रैल भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने संसद में वक्फ़ (संशोधन) विधेयक पारित होने की सराहना की और विपक्ष पर लगातार तुष्टीकरण की राजनीति करने तथा वक्फ़ संपत्ति प्रबंधन से जुड़े प्रणालीगत मुद्दों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया।

चुघ ने केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लाए गए वक्फ़ (संशोधन) विधेयक, 2025 की सराहना की और इसे देश भर में वक्फ़ संपत्तियों के प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने और सुधारने की दिशा में एक साहसिक और ऐतिहासिक कदम बताया।

चुघ ने कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र के तहत समावेशी विकास के दूरदर्शी दृष्टिकोण को दर्शाता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि इस विधेयक के कानून बनने पर वक्फ़ संपत्तियों के प्रबंधन में अति आवश्यक पारदर्शिता और जवाबदेही लाकर वास्तविक लाभार्थियों को सशक्त बनाया जा सकेगा और दशकों पुराने शोषण पर अंकुश लगाया जा सकेगा।

विपक्षी गठबंधन 'इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस' (‘इंडिया’) पर हमला करते हुए चुघ ने उस पर लगातार तुष्टीकरण की राजनीति करने और वक्फ़ संपत्ति प्रबंधन को प्रभावित करने वाले प्रणालीगत मुद्दों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया।

पंजाब में भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा, "कई वर्षों से इन संपत्तियों का सामुदायिक कल्याण की आड़ में 'रियल एस्टेट माफियाओं' और 'राजनीतिक एजेंटों' के गठजोड़ द्वारा दुरुपयोग किया जाता रहा है। नया विधेयक इस कुप्रबंधन को खत्म कर देगा और समुदाय-केंद्रित विकास के लिए नए दरवाजे खोलेगा।"

चुघ ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर लोकसभा में वक्फ़ विधेयक पर विस्तारित बहस के दौरान उनकी चुप्पी के लिए निशाना साधा।

चुघ ने कहा, "सदन में बोलने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलने की उनकी लगातार शिकायतों के बावजूद, यह विडंबना है कि उन्होंने ऐसी महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान अपनी राय व्यक्त करने या कोई चिंता व्यक्त करने का विकल्प नहीं चुना।"

उन्होंने कहा कि यह चर्चा राष्ट्रीय महत्व के मामले पर रचनात्मक बातचीत का अवसर थी, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने चुप रहना ही उचित समझा।

चुघ ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सुधार केवल नीतिगत परिवर्तन नहीं हैं, बल्कि यह सभी समुदायों के लिए न्याय, समानता और पारदर्शी शासन के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का परिचायक है।

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