विदेश की खबरें | बांग्लादेश युद्ध अपराध न्यायाधीकरण ने तीन लोगों को मौत की सजा सुनाई
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ढाका, 31 मई बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधीकरण ने तीन लोगों को वर्ष 1971 में देश के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सेना से साठगांठ कर मानवता के खिलाफ अपराध करने का दोषी ठहराते हुए मंगलवार को मौत की सजा सुनाई।
वरिष्ठ अभियोजक सईद हैदर अली ने कहा, ‘‘एक दोषी फरार है और उसकी अनुपस्थिति में मुकदमा चला लेकिन अन्य दो सुनवाई के दौरान जेल में रहे...ये सभी जमात-ए-इस्लामी (पार्टी) के कार्यकर्ता हैं।’’
उल्लेखनीय है कि जमात-ए- इस्लामी ने वर्ष1971 में बांग्लादेश की पाकिस्तान से आजादी की लड़ाई का विरोध किया था जबकि उसके कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तानी सेना की सहायक इकाइयों जैसे रजाकर और गेस्टापो, अलबदर में अहम भूमिका निभाई थी।
न्यायमूर्ति शाहीनुर इस्लाम की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय न्यायाधीकरण ने तीनों दोषियों को मौत होने तक फांसी पर लटकाने की सजा सुनाई।
दोषी ठहराए गए आरोपियों की उम्र 60 और 70 साल से अधिक है और वे जमात के अन्य नेताओं के चर्चित नेताओं से कम चर्चित हैं। इनपर उत्तर पश्चिम नौगांव जिल में रजाकर के तौर पर अत्याचार करने के लिए मुकदमा चलाया गया।
अभियोजन पक्ष के वकीलों ने बताया कि तीन दोषियों में से रजुल करीम उर्फ मोंटू फरार है। करीम वह शख्स है जिसने अपने पुश्तैनी नौगांव जिले में रजाकरों का नेतृत्व किया था। उन्होंने बताया कि अन्य दो दोषी शाहिद मंडल और नजरुल इस्लाम हैं जिन्होंने उसका साथ दिया था।
मोंटू वर्ष 1971 में उत्तर पश्चिम राजशाही विश्वविद्यालय का छात्र था और जमात की छात्र इकाई इस्लामी छात्र संघ का नेता था।
बांग्लादेश के युद्ध अपराध कानून के तहत दोषी फैसले को उच्चतम न्यायालय के शीर्ष अपीलीय प्रकोष्ठ में चुनौती दे सकते हैं।
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