जयपुर, 14 सितंबर वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश माथुर ने बताया कि ‘एटोपिक एक्जिमा’ विश्व स्तर पर बड़ी समस्या है और दुनिया में लगभग 22 करोड़ लोग इस बीमारी के साथ जी रहे हैं जिनमें से लगभग चार करोड़ लोगों की उम्र एक से चार वर्ष है।
‘विश्व एक्जिमा’ दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. माथुर ने बताया कि एटोपिक एक्जिमा वाले लोगों में खाद्य एलर्जी, बुखार और अस्थमा विकसित होने का खतरा होता है।
उन्होंने बताया कि एटोपिक एक्जिमा के लक्षण शरीर पर कहीं भी प्रकट हो सकते हैं और प्रत्येक व्यक्ति में व्यापक रूप से भिन्न हो सकते है।
उन्होंने बताया कि बार-बार खुजलाने से त्वचा फट जाती है जिससे खुले घाव और दरारें हो सकती हैं। इनसे बैक्टीरिया और वायरस से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
ये त्वचा संक्रमण फैला सकते हैं और जीवन के लिए खतरा बन सकते है। इस अवसर पर अस्थमा रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरेन्द्र सिंह ने बताया कि एटोपिक एक्जिमा शुष्क, खुजलीदार और सूजन वाली त्वचा के कारण होता है।
यह छोटे बच्चों में होता है। एटोपिक एक्जिमा लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है, लेकिन यह संक्रामक नहीं है।
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