देश की खबरें | असम की सकल कृषि भूमि में मामूली गिरावट, सिंचित क्षेत्र में वृद्धि : मंत्री
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. असम में सकल कृषि भूमि 2015-16 के बाद से पिछले नौ वर्षों में मामूली रूप से कम हुई है, जबकि सिंचित भूमि क्षेत्र में वृद्धि हुई है। प्रदेश के सिंचाई मंत्री अशोक सिंघल ने शुक्रवार को विधानसभा में यह जानकारी दी।
गुवाहाटी, सात मार्च असम में सकल कृषि भूमि 2015-16 के बाद से पिछले नौ वर्षों में मामूली रूप से कम हुई है, जबकि सिंचित भूमि क्षेत्र में वृद्धि हुई है। प्रदेश के सिंचाई मंत्री अशोक सिंघल ने शुक्रवार को विधानसभा में यह जानकारी दी।
निर्दलीय विधायक अखिल गोगोई के एक सवाल का जवाब देते हुए सिंघल ने कहा, “राज्य में सकल कृषि भूमि 2015-16 में 35.09 लाख हेक्टेयर थी, जो 2024-25 में घटकर 34.94 लाख हेक्टेयर रह गई है।”
उन्होंने कहा, “इसी अवधि के दौरान शुद्ध कृषि भूमि 28.01 लाख हेक्टेयर से मामूली रूप से बढ़कर 28.62 लाख हेक्टेयर हो गई।”
मंत्री ने कहा, “2015-16 में शुद्ध सिंचित भूमि और सकल सिंचित भूमि क्रमशः 3.25 लाख हेक्टेयर और 4.55 लाख हेक्टेयर थी, जो राज्य की कुल कृषि भूमि का 11.60 प्रतिशत थी।”
उन्होंने कहा कि 2024-25 में शुद्ध सिंचित भूमि और सकल सिंचित भूमि क्रमशः 6.95 लाख हेक्टेयर और 8.80 लाख हेक्टेयर है, जो कुल कृषि भूमि का 24.28 प्रतिशत होगी।
वहीं राज्य के विपक्षी दलों ने शुक्रवार को ‘कछार’ के लिए विशेष पैकेज की मांग की। उनका कहना है कि इन इलाकों के निवासियों के पास पर्याप्त शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और अन्य बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। कछार समुद्र या नदी के किनारे की भूमि को कहते हैं जो तर या नीची होती है।
सरकार ने हालांकि दावा किया कि “विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कछार इलाकों का विकास और कल्याण किया जा रहा है और विशेष पैकेज की कोई आवश्यकता नहीं है।”
कांग्रेस विधायक अब्दुल बातिन खांडाकर ने विधानसभा में प्रस्ताव पेश कर सरकार से कछार इलाकों में विकास संबंधी असमानता को कम करने के लिए विशेष पैकेज देने का आग्रह किया था।
खांडाकर ने दावा किया कि कछार इलाकों में, जहां ज्यादातर बंगाली मुस्लिम रहते हैं, “पर्याप्त बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।” उन्होंने कहा, “इन इलाकों में साक्षरता दर बढ़ाने और अधिक आर्थिक गतिविधियां सुनिश्चित करने की जरूरत है।
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