देश की खबरें | जलवायु परिवर्तन से गरीब देशों के नुकसान की भरपाई से जुड़े समझौते से अमेरिका पीछे हटा

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नयी दिल्ली, सात मार्च अमेरिका उस वैश्विक समझौते से पीछे हट गया है, जिसके तहत विकसित देशों ने विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए वित्तीय मदद देने की प्रतिबद्धता जताई है।

संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता में हिस्सा लेने वाले अफ्रीकी देशों के गठबंधन, अफ्रीकी वार्ताकार समूह (एजीएन) ने अमेरिका के हानि एवं क्षति प्रत्युत्तर निधि बोर्ड से बाहर होने पर गहरी निराशा जताई है।

एजीएन के अध्यक्ष अली मोहम्मद ने कहा, “जलवायु परिवर्तन के लिए ऐतिहासिक रूप से सबसे ज्यादा जिम्मेदार देश द्वारा लिया गया यह फैसला अपरिवर्तनीय जलवायु प्रभावों का सामना कर रहे कमजोर देशों के लिए महत्वपूर्ण सहायता को खतरे में डालता है।”

अमेरिका के जलवायु एवं पर्यावरण कार्यालय की उपनिदेशक रेबेका लॉलर ने हानि एवं क्षति प्रत्युत्तर कोष के विकसित देशों के सह-अध्यक्ष जीन क्रिस्टोफे डोनेलियर को भेजे आधिकारिक पत्र में लिखा है, “मैं अमेरिका के वित्त विभाग की ओर से आपको सूचित करने के लिए लिख रही हूं कि अमेरिका हानि एवं क्षति प्रत्युत्तर निधि बोर्ड से तत्काल प्रभाव से हट रहा है।”

पत्र के मुताबिक, “अमेरिका के बोर्ड सदस्य और वैकल्पिक बोर्ड सदस्य दोनों ही पद छोड़ देंगे, लेकिन उनके स्थान पर कोई अमेरिकी प्रतिनिधि नहीं नियुक्त किया जाएगा।”

जलवायु परिवर्तन से प्रभावित विकासशील और कम विकसित देशों के वर्षों की वकालत के बाद विकसित देशों ने 2022 में मिस्र के शर्म अल-शेख में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में हानि एवं क्षति प्रत्युत्तर कोष स्थापित करने की सहमति जताई थी। 2024 में बाकू में सीओपी-29 में विकसित देशों ने एक जनवरी 2025 से कोष के तहत वित्तीय सहायता शुरू करने का फैसला लिया था।

जलवायु कार्यकर्ता हरजीत सिंह ने कहा, “हानि एवं क्षति प्रत्युत्तर कोष से पीछे हटने का अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन का फैसला न केवल जलवायु प्रभावों से निपटने के लिए आवश्यक वित्त प्राप्त करने में अमेरिकी सरकार द्वारा बाधा डालने की दीर्घकालिक प्रवृत्ति का उदाहरण है, बल्कि जलवायु न्याय प्रदान करने के वैश्विक प्रयासों को भी कमजोर करता है।”

सिंह ने कहा, “ऐतिहासिक रूप से सबसे बड़ा उत्सर्जक होने के नाते अमेरिका दुनियाभर में कमजोर आबादी को प्रभावित करने वाली प्रतिकूल जलवायु घटनाओं के लिए बहुत हद तक दोषी है। हमें उन्हें जवाबदेह ठहराना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे वैश्विक जलवायु सुधार पहलों में उचित योगदान दें।”

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