नयी दिल्ली, 24 मई दिल्ली के एक न्यायालय को अदालत के एक कर्मचारी ने बताया कि भ्रष्टाचार रोधी शाखा (एसीबी) ने एक न्यायाधीश को फंसाने के लिए कथित रिश्वतखोरी के संबंध में प्राथमिकी दर्ज की ताकि उनसे बदला लिया जा सके।
कर्मचारी ने बताया कि न्यायाधीश ने इसके पहले एजेंसी के संयुक्त आयुक्त को नोटिस जारी कर पूछा था कि कर्मचारियों को कथित रूप से धमकाने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में अवमानना का मुकदमा क्यों न दर्ज किया जाए।
विशेष न्यायाधीश दीपाली शर्मा की अदालत में अहलमद (रिकॉर्ड रखने के लिए अदालत का कर्मचारी) ने याचिका दायर करके अग्रिम जमानत देने का अनुरोध करते हुए एसीबी के खिलाफ आरोप लगाए गए।
अहलमद ने दावा किया गया कि वह निर्दोष है और उसे रिश्वतखोरी के मामले में झूठे तरीके से फंसाया गया है। अहलमद (38)को 14 सितंबर, 2023 से 21 मार्च, 2025 के बीच विशेष न्यायाधीश की अदालत में तैनात किया गया था।
जमानत याचिका में दावा किया गया कि विशेष अदालत के समक्ष लंबित अधिकांश मामलों में एसीबी मुख्य वादी है।
याचिकाकर्ता के मुताबिक, विशेष अदालत में उसके कार्यकाल के दौरान एसीबी व दिल्ली सरकार के अधिकारियों ने उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी, जिसकी वजह से उसने 25 जनवरी, 2025 को अदालत से उसका तबादला करने का अनुरोध भी किया था।
अहलमद ने अदालत को बताया, “16 मई, 2025 को पीठासीन न्यायाधीश ने एक आदेश के तहत एसीबी के संयुक्त आयुक्त को कारण बताओं नोटिस जारी किया और पूछा कि क्यों नहीं दिल्ली उच्च न्यायालय में अवमानना का मुकदमा दर्ज किया जाए। ”
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि एसीबी और दिल्ली सरकार के अधिकारियों ने विशेष अदालत के न्यायाधीश से बदला लेने के लिए याचिकाकर्ता/आरोपी के खिलाफ झूठी व मनगढ़ंत प्राथमिकी दर्ज की और साथ ही न्यायाधीश को फंसाने की कोशिश की।
न्यायाधीश शर्मा ने 22 मई को सरकारी वकील की दलील के बाद अहलमद की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
सरकारी वकील ने साजिश का पता लगाने के लिए अहलमद को हिरासत में लेकर पूछताछ की जरूरत बताई थी, जिसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ता की अर्जी को खारिज कर दिया था।
हालांकि, न्यायाधीश ने एसीबी को निर्देश दिया कि अगर गिरफ्तारी करनी है तो कानून का पालन करें।
अहलमद ने दावा किया कि उसने मामले को एक स्वतंत्र जांच एजेंसी को सौंपने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष एक रिट याचिका दायर की है।
उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले को 29 मई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
उच्च न्यायालय ने 14 फरवरी को कथित रिश्वतखोरी के लिए विशेष न्यायाधीश के खिलाफ जांच शुरू करने के एसीबी के अनुरोध को यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि जांच एजेंसी के पास न्यायाधीश के खिलाफ ‘पर्याप्त सबूत’ नहीं है।
हालांकि, उच्च न्यायालय ने एसीबी को अपनी जांच जारी रखने के लिए कहा और सुझाव दिया कि अगर विशेष न्यायाधीश की संलिप्तता वाला कोई सबूत मिलता है तो एजेंसी फिर से अदालत का दरवाजा खटाखटा सकती है।
एसीबी ने 16 मई को अहलमद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
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