ताजा खबरें | शहरों का मास्टर प्लान बनाते समय 30 वर्षो की दूरदर्शी योजना बनायी जाए : समिति

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. संसद की एक समिति ने सुझाव दिया है कि शहरों का समेकित विकास सुनिश्चित करने के लिये मास्टर प्लान बनाते समय कम से कम 30 वर्षो के लिये एक दूरदर्शी योजना बनाई जानी चाहिए जिसमें स्मार्ट सिटी मिशन, अमृत योजना, स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं को शामिल किया जाए ।

नयी दिल्ली, 10 जनवरी संसद की एक समिति ने सुझाव दिया है कि शहरों का समेकित विकास सुनिश्चित करने के लिये मास्टर प्लान बनाते समय कम से कम 30 वर्षो के लिये एक दूरदर्शी योजना बनाई जानी चाहिए जिसमें स्मार्ट सिटी मिशन, अमृत योजना, स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं को शामिल किया जाए ।

लोकसभा में पेश आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय की अनुदान की मांगों 2021-22 पर जगदम्बिका पाल की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट में यह बात कही गई है ।

रिपोर्ट के अनुसार, चूंकि दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई जैसे महानगरों में भूमि स्वामित्व रक्षा, रेलवे, बंदरगाहों, राज्य विकास प्राधिकरणों जैसी कई एजेंसियों/प्राधिकरणों के पास है । ऐसे में समिति का सुझाव है कि मास्टर प्लान तैयार करने से पहले भविष्य में इन योजनाओं के संभावित विरोध को रोकने के लिये सभी हितधारकों के साथ व्यापक विचार विमर्श किया जाना चाहिए ।

समिति ने कहा कि राज्य में किसी कार्यक्रम/योजना के वित्त पोषण को जोड़ने से पहले सम्यक प्रक्रिया का पालन करते हुए मास्टर प्लान तैयार करने की पूर्व शर्त लगाई जानी चाहिए ।

इसमें कहा गया है कि शहरों का समेकित विकास सुनिश्चित करने के लिये मास्टर प्लान बनाते समय कम से कम 30 वर्षो के लिये एक दूरदर्शी योजना बनाई जानी चाहिए जिसमें स्मार्ट सिटी मिशन, अमृत योजना, स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं को शामिल किया जाए ।

रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने नोट किया है कि एक स्मार्ट शहर परियोजना के कार्यान्वयन के लिये एक सीईओ के नेतृत्व में एक स्पेशल पर्पज व्हीकल या कंपनी सृजित की गयी है । स्मार्ट सिटी के सीईओ के बार बार स्थानांतरण के कारण कार्य प्रगति पिछड़ जाने को देखते हुए समिति यह सिफारिश की है कि स्मार्ट सिटी के स्पेशल पर्पज व्हीकल के सीईओ का कार्यकाल 3 वर्ष निश्चित किया जाए और उनका कार्य पूर्णकालिक हो एवं कोई अतिरिक्त प्रभार नहीं दिया जाए।

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