नीरज ने कहा, "सभी एथलीट का ओलंपिक में पदक जीतने का सपना होता है और स्वर्ण जीतने से बेहतर कोई भावना नहीं होती है. जब मैंने इसे जीता तो यह सपने जैसा लगा. स्वदेश वापस लौटने पर जिस तरह का सम्मान मिला उसने मुझे एहसास दिलाया कि मैंने क्या उपलब्धि हासिल की है."
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