इस ऐतिहासिक जीत में टीम की युवा ओपनर प्रतिका रावल ने अहम भूमिका निभाई, जिन्होंने टूर्नामेंट में कुल 308 रन बनाए और भारत की ओर से दूसरी सर्वाधिक रन बनाने वाली खिलाड़ी रहीं. हालांकि, दुर्भाग्यवश सेमीफाइनल से पहले उन्हें चोट लग गई, जिसके कारण वे न तो सेमीफाइनल खेल सकीं और न ही फाइनल में टीम का हिस्सा बनीं. आईसीसी के नियमों के अनुसार, जो खिलाड़ी फाइनल स्क्वाड में शामिल नहीं होता, उसे विजेता पदक नहीं दिया जाता
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