भारतीय क्रिकेटर वॉशिंगटन सुंदर बचपन से ही एक कान से सुन नहीं सकते. जब वह सिर्फ 4-5 साल के थे, तब उन्होंने अपने माता-पिता से इस परेशानी के बारे में बताया. इलाज की कई कोशिशें की गईं, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ और अंततः वह उस कान से पूरी तरह सुनने की क्षमता खो बैठे. क्रिकेट खेलते समय उन्हें इस वजह से कई परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपनी कमजोरी को ताकत में बदलते हुए खुद को एक सफल क्रिकेटर के रूप में साबित किया.
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