आए दिन हम कुछ ना कुछ सपने देखते ही रहते हैं. कुछ सपने जागने के साथ ही भूल जाते हैं, या भुला दिए जाते हैं जबकि कुछ सपने मनो-मस्तिष्क में कौतूहल जगाते हैं. कि आखिर ऐसे सपनों को किन अर्थों में लेना चाहिए? स्वप्न शास्त्र में हर सपने की भिन्न-भिन्न व्याख्याएं उल्लेखित हैं.
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