जैन धर्म के दोनों समाज (श्वेतांबर और दिगंबर) में इस पर्व का विशेष महत्व है, जिसे जैन धर्म के लोग भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में मनाते हैं. श्वेतांबर समाज के लोग यह पर्व 8 दिनों तक मनाता है, इसके बाद वहीं दिगंबर समाज के अनुयाई 10 दिनों तक पर्युषण पर्व सेलीब्रेट करते हैं.
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