भगवान पार्श्वनाथ जैन धर्म के 23वें तीर्थकर माने जाते हैं, उन्होंने अज्ञान, आडंबर, अंधकार और क्रिया क्रम के मध्य में क्रांति का बीज बनकर जन्म लिया था. जैन धर्मानुसार पार्श्वनाथ को तीर्थकंर बनने के लिए 9 बार जन्म लेने पड़े थे. पूर्व जन्म में किये पुण्य कार्यों और दसवें जन्म के कठोर तप के बाद ही वे 23वें तीर्थंकर बनें थे.
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