आश्विन शुक्ल पक्ष पंचमी यानी शरद नवरात्रि की पंचमी को भगवान शिव एवं स्कंद माता की पूजा करते हैं. इसी दिन दस महाविद्याओं में से एक ललिता देवी की पूजा-व्रत का भी विधान है. देवी ललिता को त्रिपुरा सुंदरी, षोडशी और राजेश्वरी के नामों से भी जाना जाता है. उन्हें सुंदरता, शक्ति और सौभाग्य की देवी माना जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार देवी ललिता का प्रकाट्य कामदेव के शरीर की राख से उत्पन्न भांडा नामक राक्षस के संहार के लिए हुआ था.
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