हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष आश्विन शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी के दिन कोजागिरी पूर्णिमा का व्रत एवं पूजा का विधान है. इसे कोजागिरी पूजा, कौमुदी पूजा, बंगाली लक्ष्मी पूजा आदि नामों से भी जाना जाता है. यह व्रत एवं पूजा आमतौर पर रात्रिकाल में किया जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इस पूर्णिमा की रात माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण के लिए निकलती हैं, और अपने भक्तों को धन-धान्य से संपन्न होने का आशीर्वाद देती हैं.
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