पहले हम छोटे-छोटे काम, जैसे किसी नंबर को याद रखना, बच्चों को पहाड़े सिखाना या हाल ही में देखी गई फिल्म को याद करना, आसानी से कर लेते थे. लेकिन अब, स्मार्टफोन, इंटरनेट और एप्स के इस दौर में मस्तिष्क को लगातार सुविधा मिल रही है, जिससे इसकी स्वाभाविक क्षमता धीरे-धीरे कमजोर हो रही है.
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