बालपन.. एक मासूमियत भरा चरण, जहां चिंता नहीं होती, सिर पर बोझ नहीं होता, अलबत्ता आँखों में सपने होते हैं रंग-बिरंगे, अब कल्पना करिये, अगर इनके मासूम सपनों की जगह इनके हाथ में औजार, सिर पर ईंट-पत्थरों एवं जिम्मेदारियों का बोझ रख दिया जाए तो क्या यह एक स्वस्थ समाज के लिए शर्मनाक या चिंताजनक नहीं है?
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