उत्पन्ना एकादशी से एक दिन पूर्व दशमी की शाम को सात्विक भोजन करके दातुन जरूर करें, ताकि दांतों में अन्न कण नहीं रहना चाहिए. इसके पश्चात अन्न का सेवन पूरी तरह से वर्जित होता है, अगले दिन यानी एकादशी को सूर्योदय से पूर्व स्नान-ध्यान करके स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत एवं विष्णु जी की पूजा का संकल्प लें.
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