मकर संक्रांति के साथ जहां सूर्यदेव दिशा एवं राशि में परिवर्तन कर दक्षिणायण से उत्तरायण और मकर में प्रवेश करते हैं, वहीं दिन बड़ा और रातें छोटी होने लगती हैं. खेतों में रबि की फसलें काटकर उसकी जगह जायद की फसलें बोने की तैयारी शुरु होती हैं, ठिठुरती सर्दी में भी थोड़ी गरमाहट आने लगती है.
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