‘न क्षयति इति अक्षय’ अर्थात जो कभी क्षय नहीं होता, उसे अक्षय कहते हैं. वैशाख शुक्लपक्ष की तृतीया के दिन कुछ ऐसे ही योग बनते हैं, मान्यतानुसार इस दिन हम जो भी पुण्य, बड़े-बुजुर्गों के आशीर्वाद, धन अर्जित करते हैं तो वह अक्षय होता है, इसीलिए इस दिन को ‘अक्षय तृतीया’ कहते हैं.
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