यूनिसेफ की 'चिल्ड्रन्स क्लाइमेट रिस्क रिपोर्ट 2026' के अनुसार, भारत में लगभग 39.2 करोड़ बच्चे (देश की बाल आबादी का 92 प्रतिशत) अत्यधिक गर्मी की स्थिति में रहने को मजबूर हैं. इनमें से 8.9 करोड़ बच्चे सीधे तौर पर गंभीर हीटवेव (लू) का सामना कर रहे हैं, जो उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन के लिए बड़ा खतरा है.
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