रेपो दर में कोई बदलाव न होने से उन उधारकर्ताओं को तत्काल राहत नहीं मिली है जो कम ब्याज दरों की उम्मीद कर रहे थे. हालांकि, यह निर्णय वित्तीय स्थिरता बनाए रखने और मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने के आरबीआई के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है. विश्लेषकों का मानना है कि आरबीआई भविष्य में दरों में कटौती पर विचार कर सकता है, लेकिन यह मुद्रास्फीति के आंकड़ों और वैश्विक आर्थिक स्थितियों पर निर्भर करेगा.
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