एजेंसियों का कहना है कि छात्रों और अभिभावकों से पैसे लेकर सौदे किए जाते थे. शुरुआती बातचीत और डील सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए होती थी. इस मामले ने एक बार फिर भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सीबीआई अब पेपर लीक के मुख्य स्रोत और इस नेटवर्क के प्रमुख आरोपियों की पहचान करने में जुटी हुई है.
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