मद्रास उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि वैवाहिक विवादों में व्यभिचार को साबित करने के लिए शारीरिक संबंधों का प्रत्यक्ष या सीधा सबूत होना अनिवार्य नहीं है. कोर्ट ने माना कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य विवाह विच्छेद के लिए पर्याप्त कानूनी आधार बन सकते हैं.
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