देश की सर्वोच्च अदालत ने वैवाहिक जीवन और कानूनी मानकों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने एक व्यक्ति को अपनी पत्नी को क्रूरता का शिकार बनाने के आरोपों से बरी करते हुए कहा कि वैवाहिक जीवन में मतभेद होना एक आम बात है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल कुछ दिनों तक पत्नी से बातचीत न करने के आधार पर किसी पति को आईपीसी की धारा 498A के तहत क्रूरता का दोषी नहीं ठहराया जा सकता.
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