मुंबई की अदालत ने माना है कि किसी मानव शरीर के निजी हिस्से यानी प्राइवेट पार्ट शब्द की व्याख्या उस आधार पर होनी चाहिए कि हमारे समाज में इसका क्या अर्थ है. ऐसा कहते हुए अदालत ने स्पेशन प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन अगेंस्ट सेक्सुअल ऑफेन्स यानी पॉक्सो एक्ट के तहत एक 22 वर्षीय शख्स को 10 साल की लड़की के बम को छूने के आरोप में 5 साल की जेल की सजा सुनाई है
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