जब-जब भारतीय सिनेमा की बात होगी, स्वर्गीय गुरु दत्त की चर्चा के बिना अधूरी ही होगी. उनके जीवन की क्लासिक फिल्मों प्यासा (1957), कागज के फूल (1959), चौदहवीं का चांद (1960), साहिब बीवी और गुलाम (1962), बहुरानी (1963) का आज भी कोई जवाब नहीं है. निर्माता, निर्देशक, लेखक, कोरियोग्राफर और अभिनेता जैसी तमाम विधाओं के साथ-साथ वह संगीत और लाइटिंग इफेक्ट के भी मास्टर थे.
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