लिस के अनुसार दिलीप ने अपने अन्य सहयोगियों तनवीर आलम और फरदा गांव के दशरथ के सहयोग से उक्त बच्ची का अपहरण किया और फिर तनवीर के पोल्ट्री फार्म में उसकी हत्या कर उसका रक्त और आंख निकाली एवं उसे तांत्रिक को ले जाकर. रेड्डी के मुताबिक तांत्रिक ने बच्ची की आंख और रक्त से तैयार ताबीज दिलीप को उसकी पत्नी के पहनने के लिए बनाकर दिया था.
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