TATA IPL Deepfake 2026: आईपीएल के दौरान 1200 से ज्यादा डोमेन पर अवैध सट्टेबाजी का प्रचार, डीपफेक तकनीक से लोगों को बनाया जा रहा निशाना
रिपोर्ट में बताया गया कि जांच के दौरान एक बेटिंग प्लेटफॉर्म के एडमिन पैनल तक पहुंच बनाई गई, जहां यह सामने आया कि एक ही सिस्टम से 25 से ज्यादा सट्टेबाजी वेबसाइट संचालित की जा रही थीं. क्लाउडसेक के मुताबिक, मई 2025 से मई 2026 के बीच सिर्फ एक प्लेटफॉर्म पर 9,300 से ज्यादा यूजर्स के पैसे निकालने के अनुरोध जानबूझकर खारिज कर दिए गए.
TATA IPL Deepfake 2026: टाटा इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के दौरान साइबर अपराधियों द्वारा बड़े स्तर पर अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क चलाए जाने का खुलासा हुआ है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, आईपीएल सीजन में 1,200 से ज्यादा डोमेन के जरिए गैरकानूनी बेटिंग प्लेटफॉर्म्स का प्रचार किया गया. इतना ही नहीं, लोगों का भरोसा जीतने के लिए डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल भी किया गया. डिजिटल इंटेलिजेंस फर्म क्लाउडसेक (CloudSEK) की रिपोर्ट के अनुसार, साइबर अपराधियों ने एआई आधारित डीपफेक टूल्स की मदद से भारतीय क्रिकेटरों और लोकप्रिय कंटेंट क्रिएटर्स के चेहरे और आवाज की नकली वीडियो तैयार कीं. इन वीडियो को इंस्टाग्राम रील्स और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फैलाया गया, ताकि अधिक से अधिक लोगों को फर्जी सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म्स तक पहुंचाया जा सके. यह भी पढ़ें: GT vs CSK, IPL 2026 66th Match Live Toss And Scorecard: नरेंद्र मोदी स्टेडियम में चेन्नई सुपरकिंग्स के कप्तान रुतुराज गायकवाड़ ने जीता टॉस, पहले गेंदबाजी करने का किया फैसला; यहां देखें दोनों टीमों की प्लेइंग इलेवन और लाइव स्कोरकार्ड
रिपोर्ट में बताया गया कि जांच के दौरान एक बेटिंग प्लेटफॉर्म के एडमिन पैनल तक पहुंच बनाई गई, जहां यह सामने आया कि एक ही सिस्टम से 25 से ज्यादा सट्टेबाजी वेबसाइट संचालित की जा रही थीं. क्लाउडसेक के मुताबिक, मई 2025 से मई 2026 के बीच सिर्फ एक प्लेटफॉर्म पर 9,300 से ज्यादा यूजर्स के पैसे निकालने के अनुरोध जानबूझकर खारिज कर दिए गए. इससे लोगों को करीब 4.65 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई सरकारी वेबसाइट्स को हैक कर उनमें अवैध बेटिंग प्लेटफॉर्म्स के लिंक जोड़ दिए गए थे. साइबर अपराधियों ने सरकारी वेबसाइट्स की विश्वसनीयता का फायदा उठाकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की. इसके अलावा, जांच में ऐसे बैंक खातों के नेटवर्क का भी पता चला, जिनका इस्तेमाल ‘मनी म्यूल’ के तौर पर किया जा रहा था, ताकि लेनदेन को ट्रैक करना मुश्किल बनाया जा सके. रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को इस मामले में ई-मेल भेजा गया था, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं मिला था.
(The above story first appeared on LatestLY on May 21, 2026 08:30 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

