ओडिशा के सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व में बाघिन 'जीनत' ने चार शावकों को दिया जन्म, वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बड़ी सफलता (See Pics)
बाघिन 'जीनत' ने चार शावकों को दिया जन्म (Photo Credits: X)

भुवनेश्वर, 2 जून: ओडिशा (Odisha) के मयूरभंज जिले (Mayurbhanj District) में स्थित प्रसिद्ध सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व (Similipal Tiger Reserve) (STR) से वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक बेहद उत्साहजनक और ऐतिहासिक कामयाबी सामने आई है. साल 2024 के उत्तरार्ध में महाराष्ट्र (Maharashtra) से ओडिशा लाई गई बाघिन 'जीनत' (Zeenat) ने चार शावकों को जन्म दिया है. ओडिशा के वन मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया (Ganesh Ram Singh Khuntia) ने मंगलवार को इस महत्वपूर्ण विकास की पुष्टि की.  उन्होंने बताया कि शावकों का जन्म लगभग 20 दिन पहले हुआ था और वर्तमान में पहली बार मां बनी जीनत के साथ उसके चारों शावक पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित स्थिति में हैं. यह भी पढ़ें: Amazing! अपने पांच शावकों के साथ जंगल में सैर करती दिखी बाघिन, दुर्लभ नजारा देख मंत्रमुग्ध हो जाएंगे आप (Watch Viral Video)

कैमरा ट्रैप और जीपीएस से रखी जा रही है पैनी नजर

वन विभाग ने नवजात शावकों और मां की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सिमिलिपाल के कोर एरिया (मुख्य क्षेत्र) में कड़े सुरक्षा और निगरानी उपाय लागू किए हैं. इसके तहत जीपीएस-आधारित ट्रैकिंग और उन्नत कोर-एरिया कैमरा ट्रैप का उपयोग करके चौबीसों घंटे उनकी गतिविधियों की निगरानी की जा रही है.

फील्ड अधिकारियों द्वारा जारी की गई एक ट्रैप-कैमरा तस्वीर में जीनत को बेहद सुरक्षात्मक ढंग से अपने एक शावक को मुंह में दबाकर ले जाते हुए देखा गया है. वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, यह व्यवहार बाघिन के सामान्य और मजबूत मातृ स्वभाव (Maternal Behavior) को प्रदर्शित करता है.

सिमिलिपाल टाइगर रिज़र्व में बाघिन ज़ीनत ने चार शावकों को जन्म दिया

जीन पूल के विस्तार के लिए हुआ था अंतर-राज्यीय स्थानांतरण

बाघिन जीनत को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के अंतर-राज्यीय बाघ स्थानांतरण कार्यक्रम के तहत नवंबर 2024 में महाराष्ट्र के ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व से एक अन्य बाघिन 'जमुना' के साथ सिमिलिपाल लाया गया था. इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सिमिलिपाल में बाघों के संकुचित होते जीन पूल (Genetic Pool) को व्यापक और विविधतापूर्ण बनाना था.

दरअसल, सिमिलिपाल के अधिकांश स्थानीय बाघों में 'सुडो-मेलानिज़्म' (Pseudo-Melanism) पाया जाता है, जिसके कारण उनके शरीर पर अत्यधिक चौड़ी और आपस में जुड़ी हुई काली धारियां होती हैं. यह स्थिति लंबे समय तक अन्य क्षेत्रों के बाघों से अलग रहने और 'इनब्रीडिंग' (एक ही वंश में प्रजनन) के कारण पैदा हुई थी, जिसे दूर करने के लिए जीनत को यहाँ लाया गया था.

300 किलोमीटर के सफर के बाद हुई थी जीनत की वापसी

सिमिलिपाल में छोड़े जाने के तुरंत बाद, जीनत ने उस समय देश भर की मीडिया का ध्यान आकर्षित किया था जब वह रिजर्व की सुरक्षा कड़ियों को पार कर बाहर निकल गई थी. इसके बाद उसने ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के जंगलों से होते हुए लगभग 300 किलोमीटर का सफर तय किया था. वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों की टीमों द्वारा लगातार 21 दिनों तक चलाए गए एक जटिल ट्रैकिंग ऑपरेशन के बाद उसे पश्चिम बंगाल से सुरक्षित रेस्क्यू कर वापस सिमिलिपाल लाया गया था.

इस वर्ष अप्रैल महीने में जीनत को दोबारा सिमिलिपाल के मुख्य जंगली कोर जोन में मुक्त किया गया, जहां उसने रिजर्व के ही एक स्थानीय नर बाघ 'टी-12' (T-12) के साथ अपना जोड़ा बनाया. ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस गौरवपूर्ण अवसर पर वन्यजीव प्रबंधन टीम को बधाई देते हुए कहा कि इन शावकों का जन्म यह सिद्ध करता है कि सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व वन्यजीवों के प्राकृतिक प्रजनन और उनके सुरक्षित रहवास के लिए एक पूरी तरह अनुकूल और आदर्श गंतव्य बन चुका है.