पाकिस्तान के आर्थिक संकट और बढ़ती महंगाई के साथ टैक्स लगाने का असर अब शिक्षा क्षेत्र पर पड़ रहा है, क्योंकि प्रकाशकों ने चेतावनी दी है कि अगर स्थानीय रूप से निर्मित कागज की कीमतें तय नहीं की गईं तो इस साल पाठ्यपुस्तकों की भारी कमी हो जाएगी. बाजार में पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं होने के कारण कागज की कमी की समस्या ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है
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