6 अगस्त 1971 को, जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव अपने चरम पर था और उपमहाद्वीप युद्ध की ओर बढ़ रहा था, तब एक और पाकिस्तानी राजनयिक ने अपनी सेवाओं से इस्तीफा दे दिया था. यह उस समय की कूटनीतिक हलचल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की बिगड़ती स्थिति का स्पष्ट संकेत था.
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