खाने के शौकीनों का मानना है कि खाना कैसा भी हो, जब तक आंखें इजाजत नहीं देती हैं, इंसान खाने को स्पर्श भी नहीं करता. कहने का आशय यह कि खाने का भी एक सौंदर्य शास्त्र होता है. आंखों को भाने वाला खाना ही स्वाद ग्रंथियों को अच्छा लगता है, और खाने का यह सौंदर्य काफी-कुछ हरे-भरे सलाद पर निर्भर करता है.
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