हिंदी पंचांगों के अनुसार साल में 2 बार वट सावित्री व्रत एवं पूजा का विधान है. पहली बार ज्येष्ठ मास की अमावस्या के दिन, तो दूसरी बार ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा के दिन यह व्रत रखा जाता है. इस दिन सुहागन स्त्रियां अपने दांपत्य जीवन की खुशी और पति की दीर्घायु के लिए बरगद के पेड़, सावित्री और माँ पार्वती की पूजा करती हैं.
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