टाइप-5 डायबिटीज को औपचारिक रूप से मान्यता देना इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे कुपोषण संबंधित इस डायबिटीज के डायग्नोसिस में मदद मिलेगी और आगे चलकर इसको प्रभावी तरीके से मैनेज करने में आसानी होगी. गुरुवार को 'द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ जर्नल' में प्रकाशित लेख के मुताबिक भारत में करीब 60 लाख तो वैश्विक तौर पर करीब 2.5 करोड़ लोग इससे जूझ रहे हैं.
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