हिंदी पंचांग के अनुसार हर वर्ष 2 पुत्रदा एकादशी का योग बनता है. पहली एकादशी पौष माह (दिसंबर या जनवरी) में और दूसरी श्रावण मास (जुलाई या अगस्त माह) में. मान्यता है पुत्र की कामना के साथ कोई स्त्री इस एकादशी को व्रत के साथ भगवान विष्णु एवं माँ लक्ष्मी विधिवत पूजा-अर्चना करती है, तो उसे पुत्र-रत्न अवश्य प्राप्त होता है.
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