सावन मास की चतुर्दशी तिथि पर शुभ योगों के संयोग में वरलक्ष्मी व्रत और हयग्रीव जन्मोत्सव का विशेष महत्व है. दृक पंचांग के अनुसार, चतुर्दशी तिथि शाम 2 बजकर 12 मिनट तक रहेगी, इसके बाद पूर्णिमा शुरू होगी. शुक्रवार को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र दोपहर 2 बजकर 28 मिनट तक रहेगा, फिर श्रवण नक्षत्र रहेगा. चंद्रमा मकर राशि में संचार करेगा.
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