मस्ती और भाईचारे का प्रतीक कहे जाने वाले होलिकोत्सव के बस कुछ ही दिन शेष रह गये हैं. यह पर्व ही कुछ ऐसा है कि हफ्ते भर पहले से ही पूरे माहौल में रंगों का नशा-सा छा जाता है. अबीर, गुलाल, लाल, पीले, हरे रंग, पिचकारियां टेसू के फूल आदि सर्वत्र इसी की चर्चा रहती है.
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