वैज्ञानिकोंने अत्यंत कम सांद्रता में विषाक्त अणुओं का पता लगाने का एक सरल किन्तु प्रभावी तरीका खोज निकाला है - उसी प्रक्रिया का उपयोग करके जिससे कॉफ़ी के दाग बनते हैं. जब कॉफ़ी की एक बूंद टेबलटॉप पर वाष्पित होती है, तो वह किनारे के चारों ओर एक विशिष्ट काला घेरा बना देती है.
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